बिना प्रारंभिक जांच दर्ज हुई FIR? कोर्ट के फैसले के बाद बथनाहा पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

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अररिया। पत्रकार के खिलाफ दर्ज SC/ST एक्ट के मामले को अररिया की विशेष अदालत द्वारा खारिज किए जाने के बाद बथनाहा थाना की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस अनुसंधान में आरोपों की पुष्टि नहीं होने और न्यायालय द्वारा पुलिस की फाइनल रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद अब प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

मामला बथनाहा थाना कांड संख्या 104/2024 से जुड़ा है, जिसमें पत्रकार साधन यादव को आरोपी बनाया गया था। शिकायतकर्ता की ओर से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे की हेराफेरी, जातिसूचक टिप्पणी और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

मामले की जांच के बाद अनुसंधान अधिकारी ने न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया गया। इसके बाद प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश (SC/ST), अररिया की अदालत ने शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने के अवसर दिए, लेकिन उपस्थित नहीं होने पर पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को समाप्त कर दिया।

FIR दर्ज करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल

अदालत के फैसले के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि जब जांच में आरोप सही नहीं पाए गए, तो क्या प्राथमिकी दर्ज करने से पहले तथ्यों की पर्याप्त जांच की गई थी?

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बाद आरोपी को सामाजिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पुलिस द्वारा प्रारंभिक सत्यापन और निष्पक्ष जांच की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।



सवाल जो उठ रहे हैं

  • आवेदन मिलते ही उसी दिन FIR दर्ज करने की इतनी जल्दबाजी क्यों हुई?
  • क्या प्रारंभिक तथ्यों का सत्यापन किया गया था?
  • यदि आरोप जांच में सही नहीं पाए गए, तो आरोपी को महीनों तक पुलिस कार्रवाई का सामना क्यों करना पड़ा?
  • क्या इस मामले में विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय होगी?
  • क्या झूठी शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी?
  • क्या अररिया के पुलिस अधीक्षक इस पूरे मामले की विभागीय जांच कराएंगे?

रात में छापेमारी को लेकर भी सवाल

पीड़ित पत्रकार ने आरोप लगाया है कि मामले के दौरान पुलिस द्वारा उनके घर पर कई बार छापेमारी की गई, जिससे उन्हें और उनके परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

अब SP की भूमिका पर नजर

कोर्ट के आदेश के बाद अब नजर पुलिस अधीक्षक की ओर है कि क्या इस मामले में FIR दर्ज करने और अनुसंधान की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी? क्या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होगी?

वहीं, यदि शिकायत गलत साबित हुई है तो झूठी शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई का सवाल उठ रहा है।

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