जन सुराज पार्टी को अररिया से बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य युवा उपाध्यक्ष डॉ. आर. के. झा ने जन सुराज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत अपने सभी पदों और दायित्वों से इस्तीफा देने की घोषणा की है।
डॉ. आर. के. झा ने अपने इस्तीफे के पीछे राजनीतिक और संगठनात्मक परिस्थितियों से निराशा तथा पार्टी के मूल सिद्धांतों से कथित समझौते को वजह बताया है।
उन्होंने कहा कि वे जन सुराज से किसी पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के लिए नहीं जुड़े थे। उनका उद्देश्य बिहार में स्वच्छ, पारदर्शी, जवाबदेह और सिद्धांत आधारित राजनीति को मजबूत करना था।
लेकिन डॉ. झा का आरोप है कि पिछले करीब एक वर्ष में पार्टी के भीतर लिए गए कई फैसलों और अपनाई गई कार्यप्रणाली ने उन्हें निराश किया।
डॉ. झा ने दो टूक कहा—
"राजनीति में समझौते हो सकते हैं, लेकिन सिद्धांतों और नैतिकता से नहीं।"
उन्होंने कहा कि उन्होंने संगठन के भीतर अपनी चिंताओं और असहमतियों को उचित मंच पर रखने का प्रयास किया, लेकिन जब परिस्थितियों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो अंतरात्मा और सिद्धांतों के विरुद्ध संगठन में बने रहना उनके लिए संभव नहीं था।
डॉ. झा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्ति विशेष के प्रति व्यक्तिगत दुर्भावना का परिणाम नहीं है, बल्कि राजनीतिक सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों को लेकर गंभीर असहमति का नतीजा है।
"पद छोड़ना आसान है, सिद्धांत छोड़ना नहीं"
डॉ. आर. के. झा ने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण राजनीतिक सिद्धांत हैं। उन्होंने कहा कि अगर पद बचाने के लिए सिद्धांतों से समझौता करना पड़े, तो वे पद छोड़ना पसंद करेंगे।
उन्होंने कहा कि राजनीति में उनका विश्वास सत्ता हासिल करने से ज्यादा जनता का विश्वास अर्जित करने में है।
जन सुराज से अलग होने के बाद भी डॉ. झा ने बिहार और सीमांचल के लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जारी रखने की बात कही है। उन्होंने युवाओं की भागीदारी, पारदर्शी शासन, जवाबदेही, सामाजिक न्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर सक्रिय रहने की बात कही।
उन्होंने कहा—
"मैंने एक पार्टी छोड़ी है, राजनीति नहीं। जनता के बीच रहकर जनता के लिए काम करने का मेरा संकल्प आज भी उतना ही मजबूत है।"
डॉ. आर. के. झा ने जन सुराज के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का भी आभार जताया और कहा कि उनका राजनीतिक संघर्ष किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसी राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ है जिसमें सिद्धांतों की बात तो होती है, लेकिन समय आने पर उन्हीं सिद्धांतों से समझौता कर लिया जाता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि डॉ. आर. के. झा के इस इस्तीफे का सीमांचल की राजनीति और जन सुराज के संगठन पर क्या असर पड़ता है।

